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नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर : 10 बार सीएम, अब राज्यसभा का रास्ता, BJP को मिलेगी बिहार की कमान?

by badhtabharat

पटना: बिहार की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्य की सत्ता से दिल्ली की ओर रुख करने के लिए राजी कर लिया है। नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के चेहरे पर एनडीए को मिली प्रचंड जीत के बावजूद अब वह राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर रहे हैं। 2005 से 2025 तक विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों में नीतीश ने 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। अब सवाल यह है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? क्या भाजपा कोई चौंकाने वाला चेहरा सामने लाएगी या परंपरागत नामों पर दांव खेलेगी?

नीतीश कुमार का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्होंने पहली बार 2000 में सिर्फ सात दिनों के लिए मुख्यमंत्री पद संभाला था। उसके बाद से वह बिहार की राजनीति के केंद्र में बने रहे, गठबंधनों को तोड़ते-जोड़ते हुए। अब राज्यसभा जाने के फैसले से बिहार में नई सत्ता समीकरण बनने की संभावना है। भाजपा सूत्रों के अनुसार, नीतीश के जाने से पार्टी को पहली बार बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने का मौका मिलेगा, जो 2014 के बाद से उसके चौंकाने वाले फैसलों की कड़ी में शामिल होगा।

नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री बनने का सफर

नीतीश कुमार बिहार के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं। उनके कार्यकाल में विकास, सुशासन और गठबंधन राजनीति की मिसालें देखने को मिलीं। यहां उनके मुख्यमंत्री पद की शपथों का क्रमवार विवरण:

  • 2000: पहली बार 3 मार्च 2000 को नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत न जुटा पाने के कारण 10 मार्च को इस्तीफा देना पड़ा। यह सिर्फ सात दिनों का कार्यकाल था।
  • 2005: विधानसभा चुनाव में भाजपा के समर्थन से नीतीश दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। यह एनडीए गठबंधन की शुरुआत थी, जिसने बिहार को ‘जंगल राज’ से बाहर निकालने का दावा किया।
  • 2010: एक बार फिर विधानसभा चुनाव में जीत के बाद तीसरी बार शपथ ली। इस कार्यकाल में सुशासन बाबू की छवि मजबूत हुई।
  • 2014: लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया। जीतन राम मांझी को सीएम बनाया, लेकिन 2015 में अंदरूनी कलह के बाद मांझी को हटाकर चौथी बार खुद शपथ ली।
  • 2015: महागठबंधन (जदयू, राजद, कांग्रेस) की जीत के बाद पांचवीं बार मुख्यमंत्री बने। यह गठबंधन एनडीए के खिलाफ था।
  • 2017: तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद महागठबंधन छोड़कर एनडीए में लौटे। जुलाई 2017 में छठी बार शपथ ली।
  • 2020: विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बावजूद जदयू की सीटें कम होने पर भी सातवीं बार मुख्यमंत्री बने। भाजपा में असंतोष की खबरें आईं।
  • 2022: एनडीए से अलग होकर महागठबंधन में लौटे और आठवीं बार शपथ ली।
  • 2024: जनवरी में महागठबंधन छोड़कर फिर एनडीए में शामिल हुए, नौवीं बार मुख्यमंत्री बने। भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
  • 2025: नवंबर के चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद दसवीं बार शपथ ली। अब यह उनका आखिरी कार्यकाल साबित हो रहा है, क्योंकि वह राज्यसभा जा रहे हैं।

नीतीश कुमार ने 37 साल की राजनीति में वीपी सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी सरकारों में केंद्रीय मंत्री भी रहे। अब मोदी सरकार में उनकी भूमिका क्या होगी, यह देखना बाकी है।

अगला मुख्यमंत्री कौन? 

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार का नया मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इस पर सस्पेंस बरकरार है। भाजपा 2014 से चौंकाने वाले फैसले लेती रही है—जैसे नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना। संभावित नामों में शामिल हैं:

  • नित्यानंद राय: केंद्रीय राज्यमंत्री, 2020 चुनाव से पहले चर्चा में थे।
  • सम्राट चौधरी: उपमुख्यमंत्री, 2025 चुनाव से पहले नाम उभरा।
  • नितिन नवीन: भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष, लेकिन राज्यसभा नामांकन के बाद सीएम की दौड़ से बाहर माने जा रहे हैं।
  • श्रेयसी सिंह: भाजपा कोटे की मंत्री, महिला चेहरे के रूप में चर्चा।

कुछ सूत्रों का कहना है कि भाजपा कोई नया चेहरा ला सकती है, जो ओबीसी या ईबीसी समुदाय से हो। नीतीश कुमार कब इस्तीफा देंगे—खरमास से पहले या बाद—यह भी सवाल है। एनडीए विधायकों के बयानों से लगता है कि फैसला जल्द होगा।

नीतीश कुमार के इस फैसले को ‘महा-त्याग’ कहा जा रहा है। पटना में जदयू दफ्तर में हंगामा हुआ, जहां अमित शाह नीतीश से मिले। राजद नेता तेजस्वी यादव ने इसे भाजपा की साजिश बताया। बिहार में राजनीतिक हलचल तेज है, और सभी की नजरें नए सीएम पर टिकी हैं।