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भालू-बाघ के बाद अब बंदरों का आतंक, वन विभाग की भूमिका पर सवाल

by badhtabharat
  • घर से स्कूल के रास्तों तक खतरा
  • बंदरों के हमले में महिला घायल
  • बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित

गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले में भालू और बाघ की दहशत के बीच अब बंदरों का आतंक भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। आबादी में घुस रहे बंदर घरों से सामान उठा रहे हैं और लोगों पर झपट्टा मारकर उन्हें घायल कर रहे हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित हैं। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि वन्यजीवों के बढ़ते आतंक से लोगों को राहत दिलाने के लिए वन विभाग के स्तर पर कितने प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

रविवार को कर्णप्रयाग के गांधीनगर निवासी उषा देवी पर बंदर ने झपट्टा मारकर उन्हें घायल कर दिया। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बंदरों के उत्पात से लोग परेशान हैं। घरों के आसपास और रास्तों में बंदरों की मौजूदगी के कारण लोगों को सतर्क रहना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को लेकर है। अभिभावकों को डर है कि रास्ते में बंदरों के हमले से बच्चे चोटिल हो सकते हैं।

वन विभाग की सक्रियता पर निगाहें

भालू और बाघ की सक्रियता के बीच बंदरों का आतंक बढ़ने से वन विभाग के सामने चुनौती और बढ़ गई है। लोगों को उम्मीद है कि विभाग प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति का आकलन कर बंदरों को पकड़ने या आबादी से दूर करने के लिए नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई करेगा। साथ ही स्कूलों के आसपास और आवाजाही वाले रास्तों पर खतरे को देखते हुए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

सिर्फ चेतावनी नहीं, ठोस कार्रवाई की जरूरत

स्थानीय निवासी योगेंद्र बिष्ट, मुकुल बिष्ट, अनीता देवी आदि का कहना है कि वन्यजीवों से बचाव के लिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह देना पर्याप्त नहीं है। हमलों की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और जनसुरक्षा के उपाय जरूरी हैं। अब देखना होगा कि वन विभाग बंदरों के आतंक से परेशान लोगों, खासकर स्कूली बच्चों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।